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एमजीएम अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में डॉक्टरों के ना रहने से मरीजो की हालत नाजुक

  • एमजीएम अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में डॉक्टरों के ना रहने से मरीजो की हालत नाजुक ।
  • परिजनों ने किया हंगामा।
  • मंत्री के पैर पकड़कर परिजनो ने इलाज करवाने की गुहार लगाई।
  • मंत्री हुऐ शर्मसार, कहा जब इलाज ठीक से नहीं करवा सकते तो बाकी के वायदे कैसे होंगे पूरे।

लाला जबीन, जमशेदपुर, १३ अगस्त : कोल्हान का सबसे बड़ा सरकारी एमजीएम अस्पताल मे शाम 5 बजे से लेकर रात 9 बजे तक कोइ डॉक्टर मौजूद नही थे। यह बात मरीज के परिजनो ने कही। जहां डॉक्टर नही होने से अस्पताल के एमरजेंसी वार्ड मे दो मरीजो कि मौत हो गई। घंटो इमरजेंसी वार्ड मे डॉक्टर नही होने से सीरियस मरीज तड़पते रहे। जिसके बाद मरीज के परिजनों का हंगामा बढ़ गया और पूरे अस्पताल मे जमकर हंगामा करते हुए मेन गेट का ताला बंद कर दिया। घंटो अस्पताल मे हंगामा चलता रहा और सीरियस मरीज अस्पताल के एमरजेंसी वार्ड मे तड़पते रहे, अस्पताल मे जो नर्से थी वो हंगामा बढ़ता देख अस्पताल छोड़ कर भाग खड़ी हुई। मीडिया को जानकारी मिलते ही वे घटनास्थल पहुंचे और तुरन्त मीडिया कर्मियो ने इसकी जानकारी राज्य के मंत्री को दि। जिसके बाद एमजीएम अस्पताल मंत्री सरयू राय पहुंचे। जहां उन्होने भी देखा की एमरजेंसी मे ना ही डॉक्टर मिले ना ही नर्स। मंत्री सरयू राय ने इसकी शिकायत रांची मुख्य सचिव को कर दी। जिसके बाद आनन फानन मे एमजीएम अस्पताल के अधिक्षक और कइ डॉक्टरो मौके पर पहुचे।  सभी मरीजो का इलाज शुरु कर दिया, जिसके बाद हंगामा कम हुआ ।

अस्पताल मे घंटो डॉक्टर गायब रहने के वजह से इमरजेंसी मरीजो का इलाज नहीं हो सका वे मरीज तड़पते रहे। वही अस्पताल मे मंत्री को सामने देख, परिजनो ने उनके पैर पकड़ लिए और रोने लगे कहा कि अस्पताल के डॉक्टरो कि लापरवाही से इन लोगो की मौत हो गई। इस घटना को देख मंत्री भी भावुक हो गए। उन्होने कहा कि मुझे खूद शर्म आ रही है, यह घटना सरकार के लिए काफी शर्म कि बात है। जब अस्पताल हम नही सुधार पा रहे है तो क्या दावे करते है। घटना के बाद अस्पताल के अधिक्षक ने जांच कर कारवाई करने कि बात कही ।

मरीजो की मौत होने पर आक्रोशित लोगों ने काफी हंगामा शुरू कर दिया। हंगामा बढ़ता देख भारी संख्या मे अस्पताल मे पुलिसबल कि तैनाती कर दि गई। लोगो को बल का प्रयोग कर शांत करवाया गया ।अब देखना ये है कि अस्पताल की व्यवस्था कब तक ठीक होती है,  या इसी तरह गरीब मरीजो कि मौत अस्पताल मे होती रहती है।  वहीं आकड़ो कि बात करे तो छ महीनो में अस्पताल मे लगभग 97 लोगो कि मौत डॉक्टरों की लापरवाही की वजह से हो चुकी है ।

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