জেলা পূর্ব ও পশ্চিম বর্ধমান রাজ্য

लोहा चोरी सिंडिकेट के चलते एक तरफ बैंको को करोड़ों का नुकसान दूसरी तरफ श्रमिकों को नहीं मिल पा रहा बकाया राशी।

दुर्गापुर, डिजिटल डेस्क : पिछले ३ सालों से बंध दुर्गापुर-अंगदपुर शिल्पांचल में कई कारखानों में से एक भास्कर सारची कारखाना है। ये सारा इलाका वार्ड नम्बर ३६, ३७, ३८ दुर्गापुर म्युनिसिपल कारपोरेशन के अंतर्गत पड़ता है। पिछले ३१ अगस्त को इलाके के लोग व श्रमिकों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए भास्कर सारची कारखाना के समीप अपना रोष व्यक्त की एवं धरना प्रदर्शन किया। श्रमिको ने कारखाना प्रबंधन एवं स्थानीय प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले ३ वर्षों से हमारा मजदूरी बकाया है, कारखाना प्रबंधन ने कई बार वादे किये मगर आजतक हमारे बकाये में से कुछ भी भुगतान नहीं किया। हमलोग आशा में थे कि मंदी से उभरकर कारखाना फिर से अपनी उत्पादन शुरू करेगा एवं नये के साथ साथ हमारे पुराने बकाया राशी भी हमे मिलते रहेंगे। पर पिछले कुछ महीनों से इस बंद फैक्टरी से जिस प्रकार सामानों की चोरी हो रही है ये देखकर हमलोगों में काफी क्रोध और निराशा है, अब ये फैक्टरी दुबारा उत्पादन कर पायेगी ये उम्मीद हमे नही लग रही है क्योंकि अंदर से कीमती लोहा, पीतल औऱ तांबा ये अवैध लोहा कारबारी दिन-रात जिस तरह से निकाल कर बेच रहे है उससे दुबारा फैक्टरी जिंदा होने की उम्मीद अब नहीं है।

ज्ञात हो कि इस तरह की फैक्टरी राज्य सरकार से सबसिडी औऱ बैंक से काफी मात्रा में ऋण लेकर शुरू किया जाता है। राज्य सरकार औऱ बैंक इलाके के विकास और मजदूरों के रोजी को ध्यान में रखकर इन फैक्टरियों को इस तरह की सुविधा उपलब्ध कराती है। परंतु जब फैक्टरी दिवालिया घोसित होती है तो उस कारखाने की चल-अचल सम्पत्ति बैंक के कब्जे में चली जाती है और उसकी देखरेख करना एवं किसी को बेचना या डिस्मेंटल कर बेचना सारे बैंक के इख्तियार में रहता है।

परंतु स्थानीय प्रशासन एवं स्थानीय नेताओ से सांठगांठ कर ये अवैध लोहा कारबारी जिस तरह से ये कीमती लोहा, पीतल, तांबा चोरी कर अन्यत्र बेच रहे इससे बैंको का करोड़ों का नुकसान के साथ-साथ मजदूरों के बकाया राशी मिलने के आसार भी कम हो रहे है।

पिछले २ सितंबर को स्थानीय लोगो द्वारा डिटीपीएस थाने में शिकायत करने पर पुलिस हरकत में आती है एवं रंगे हाथ एक मारुति पिक-अप वैन को पकड़ती है जिसमें काफी मात्रा में लोहा, पीतल व तांबा पाया जाता है एवं पुलिस दो अपराधी की गिफ्तारी भी करती है। पुलिस के साथ होने की पुष्टि इस गिरफ्तारी व पिक-अप वैन के जप्त होने के बाद स्थानीय लोगो ने कही। क्योंकि उस जप्त वैन का नम्बर WB-40AK-8938 इस गाड़ी का मालिक का नाम श्रवण चौधरी, जोकि उसी इलाके में अवैध लोहा के सिंडिकेट चलाने का मूल व्यक्ति है, पुलिस इस श्रवण को गिरफ्तार नहीं करती है जिससे इलाके के लोगो मे काफी रोष है। आपको बताते चले कि श्रवण चौधरी, उमेश कुशवाहा एवं संतोष चौधरी ये तीन व्यक्ति इस अवैध लोहा सिंडिकेट को चलाने का काम करते है। इन्होंने माया बाजार इलाके में अवैध लोहा, पीतल व तांबा रखने के लिये कई गोदाम घर बना रखा है।

हैरानी तो उस वक्त लगा जब पुलिस के मौजूदगी में चोर फैक्टरी के पीछे रास्ते से बड़े मजे के साथ फैक्टरी के कीमती सामानों को ले जा रहे है और वो भी छोटे बच्चों के मदद से। इससे साफ पता चलता है कि पुलिस अपनी भूमिका किस प्रकार निभा रही है क्योंकि हमारे संवाददाता को जो चोरी नजर आ रही थी वहीं बैठा ड्यूटीरत पुलिस को कुछ दिख नहीं रहा था।

दिन में और रात में इस तरह बंद फैक्टरी से कीमती सामानों की चोरी करना इसमें प्रसाशन के साथ साथ स्थानीय नेताओं का सांठगांठ की बात बिल्कुल स्पष्ट होता जा रहा है, शासक दल के पुराने व नये पार्षद के सहमति भी कहीं ना कहीं दिख रही है। पुलिस सूत्र की माने तो, इस बीच पुलिस ने आनन-फानन में इस केस से जुड़े ५ अपराधी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। पर पिक-अप वैन के मालिक को गिरफ्तार नहीं  किया। ये अपने आप मे पुलिस के  भूमिका को पूरी तरह सही नही ठहराती है।

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